करन जौहर के बारे मे कहा जाता है कि वो एक बड़बोले किस्म वाले अमीरो के शहजादे हैं, लेकिन शायद ये वाक्य जितना घुमावदार उससे कहीं ज्यादा घाुमावदार है करन जौहर का चरित्र.... कभी खुशी..कभी गम, कुछ कुछ होता है, ऐ दिल है मुश्किल जैसी पिक्चरों के जरिए करन जौहर की छवि एक ऐसे फिल्मकार की बनती है जो अमीर लोगो कि जीवनशैली को रूपहले पर्दे पर उतारने के लिए ही बना है।
लेकिन मैं जितना ज्यादा करन जौहर की जिंदगी को और उनके चरित्र को करीब से जानने की कोशिश करती हूॅं.... उतना ही वो सुलझे हुए किस्म के व्यक्ति लगते है। उनकी किताब ‘अनसूटेबल बाॅय‘ के जरिए उन्होने अपनी जिदंगी के उन के पहलुओं पर से पर्दा उठाया जो शायद लोगो के बीच महज़ एक अफवाह थी..... किसी व्यक्ति का समलैंगिक होना उसके जीवन के सबसे बड़े रहस्यों मे से एक होता है, क्योकि आज भी भारतीय लोगो की सोच रूढ़वादी है... इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि भारत ने तकनीकी क्षेत्र मे कितनी तरक्की कर ली है.... क्योकि असल में फर्क इस बात से पड़ता है भारतीय सोच ने कितनी तरक्की कर ली है... आज भी लोगो को लगता है किसी भी व्यक्ति का समलैंगिक होना उसकी एक बिमारी है जो उनके घरेलू उपाय और पंडितों की पूजा अर्चनाओं से ठीक हो सकती है। आज भी ऐसे बहुत सारे लोग है जो समलैंगिक होते हुए भी समाज के डर से अपना जीवन अंधकार में बितातें है। लेकिन ऐसे में कुछ और लोग भी होते है... जो अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीते है और किसी के भी डर से खुद नही बदलते है। उन्ही लोगो में एक नाम है करन जौहर... अपनी किताब में करन जौहर ने शब्दों के खेल के साथ खेल खेलककर अपना समलैंगिक होना जगजाहिर किया।अपने इंटरव्यू में करन जौहर हमेशा एक होशियार और कामयाब इंसान की छवि छोड़कर जाते है। अपने एक इंटरव्यू में करन ने बताया कि कैसे उन्हे अपनी जिंदगी में कैसे कैसे लोगो का सामना करना पड़ा... एक बार एक व्यक्ति एयरपोर्ट पर करन जौहर के पास आकर बोलता है कि ‘‘क्या तुम समलैंगिक हो?‘‘..और वो इस तरह करन की पीठ सहला रहा था जैसे कि पिछली रात ही उन्होने साथ में डिनर किया हो...
मैं करन जौहर की बतौर एक फिल्मकार भले ही उतनी इज्जत ना करती हॅंू लेकिन वो जिस तरह के इंसान हैं.. जिस तरह की सोच रखते है... उसकी इज्जत हर इंसान को करनी चाहिए... खुद के बारे में विश्वास रखना... खुद को अपनाना और परिवार से कैसे प्यार करते हैं इसकी सीख हर नौजवान को करन जौहर से लेनी चाहिए...
Long before this blog.. I used write but just for myself.. I told my opinions to myself... but that never felt right because I always knew that I don't belong to that part of the society.. where people actually stay mum on everything. With the idea of raising my voice and opinions.. I started this blog.. Hope you'll find my posts worth reading.. Open to criticism and comment.. Reagrds Anushree Rastogi anushreemrastogi@gmail.com


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