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र्निभया





आपकी मर्जी के बिना के जब कोई आपका सामान भी छूता है तो आप तिलमिला जाते होंगे.. ज़रा सोचिए जब आपके बदन को कोई आपका बिना मर्जी के छूता या देखता होगा.. तो कैसा लगता होगा?
रेप एक ऐसा शब्द है तो हर औरत के जहन में एक कौफ का मंजर पैदा कर देता है.... आज से 5 साल पहले 16 दिसंबर को एक 23 साल की एक महत्वकांक्षी डाक्टर के साथ 6 दरिंदो ने जो किया था उसकी कंपन्न पूरे देश की औरत ज़ात ने महसूस की थी। उस दिन के बाद देश की हर औरत और हर लड़की ने उसके लिए इंसाफ की गुहार लगानी शुरू कर दी थी, लाखों लोेगो ने धरने दिए, प्रदर्शन किए और ना जाने कितने कितने दिन जनतर मंतर पर अपनी आवाज को बुलंद करने की कोशिश की लेकिन आखिर में क्या हुआ.......... सब शांत हो गया... सब ठंडा पड़ गया... और प्रशासन? मत पूछिए क्योकि गांधी जी के तीन बंदरो की मुद्रा तो इन्होने अपने लिए ही पेटेंट करा रखी है।

र्निभया की मां ने 5 साल पहले अपनी बच्ची को खोया था और उस दिन के बाद से उसने हर उस बच्ची की आवाज बनने का फैसला लिया जिसकी आवाज को दबाया गया लेकिन क्या बदल गया सिर्फ र्निभया की मां की जंग से..... क्योकि पिछले 5 सालों में करीब 36,700 रेप केसज़ को दर्ज किया गया है।
ज़रा ये आंकड़ा एक बार फिर देखिए और सोचिए कि 36,700 औरतों के साथ जो दरिंदगी हुई है क्या वो सही है?

जब 2012 में पूरा देश र्निभया के साथ हुए दर्दनाक मंजर में रो रहा था तो लगा था कि चलों अब तो कुछ बदलेगा लेकिन नही...... ये देश और इसका कानून वो चिकना घड़ा है जो अपने देश के लिंग को कोई सिक्योरिटी देने की हिम्मत ही नही रखता है। मैं आज जब अपने घर से निकलती हूॅं और पांच मिनट भी किसी सूनसान सड़क पर चलती हूॅं तो लगता है कि कोई उठा कर ना ले जाए... कोई परेशान करने ना आ जाए.. कोई जबरदस्ती आकर हाथ ना पकड़ ले... और मेरे ऐसा सोचने पर अगर किसी ने मुझे सबसे ज्यादा मजबूर किया है तो वो है मेरा खुद का समाज और मेरे अपने देश का कानून... पिछले 5 सालों में करीब 277 प्रतिशत रेप बढ़े है। ये आकड़ा बहुत है हम औरतों को डराने के लिए.....

किसी भी देश की राजधानी आइना होती है उस देश की सीरत का... लेकिन दिल्ली में औरते जितनी ज्यादा असुरक्षित है उससे ज्यादा कही और नही है। सोचिए जब देश की राजधानी में ही औरतें सुरक्षित नही है तो मैं या कोई और औरत क्या उम्मीद करेगी कि वो किसी छोटे शहर या कस्बे में सुरक्षित रह पाएगी।

देश में होने वाले इन रेप की जड़ कोई और नही हमारा समाज ही है। क्योकि इसने हमेशा मर्दों को ये बताया है कि बेटा ये औरतें जानवर की तरह होती है जो मन में आए करो... माॅं बाप के घर बाप और भाई बताता है कि क्या करना है क्या पहनना है क्या खाना है किसके साथ बात करनी है और आखिर में किस आदमी के घर जाकर उसके माॅं बाप की सेवा करके उसके बच्चे पैदा करने है। वहीं, शादी के बाद पती सास ससुर बताते है कि क्या खाना है कहाॅं जाना है किसके साथ जाना है.. जाना भी है या नही.. मतलब हैसियत देखिए इनकी कि अपने ही मायके जाने के लिए औरतों को पति और सास ससुर से पूछना पड़ता है।
इस समाज ने जितना औरतों को नीचे गिराया है ना आज उसी की सज़ा इस समाज की बेटियों को मिल रही है। 

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