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KIRRON KHER: Imbecile Politician





बहुत इज्जत करती हूॅं मैं किरन खेर की क्योंकि वो एक कमाल की अदाकारा हैं, लेकिन बीजेपी सांसद किरण खेर ने गुरूवार को एक विवादित बयान दिया जिसमें उन्होनें चड़ीगढ़ रेप पीड़िता को एक नसीहत देते हुए कहा कि अगर एक आॅटो में पहले से दो आदमी मौजूद हैं और कोई भी महिला नही थी तो उसे बैठना ही नही चाहिए था। उन्होने ये भी कहा कि हम लोग भी मुंबई में कभी टैक्सी लेते थे, तो जो हमारे साथ हमें छोड़ने आता था हम उन्हें अपना टैक्सी नंबर लिखवा देते थे क्योंकि एक लड़की होने के नाते हम खुद को सुरक्षित रखना चाहते थे।

ये सब एक सशक्त महिला के मुॅंह से सुनने के बाद मुझे ऐसा लगता है कि क्या इतनी ज्यादा सशक्त और स्वतंत्र महिला को भी लगता है कि रेप होना लड़कियों की गलती है? मुझे इस देश के अधिकतर पुरूष नेताओं से कोई उम्मीद नही है कि वो कभी भी किसी रेप पीड़िता का साथ देंगे लेकिन में किरण खेर जैसी महिला से मैं पूरी से आशा रखती थी की कम से कम उन्हें तो लगता होगा कि रेप होना किसी लड़की के कपड़ों और उसके घर से बाहर निकलने समय की गलती नही हैं, अगर इस सब में कोई दोषी है तो वो है रेप करने वाला दरिंदा... उसकी सोच और उसकी परवरिश...

एक लड़की की इज्जत से जब खिलवाड़ होता है ना तो उसके दर्द... उसके मानसिक संतुलन का अंदाजा कोई नही लगा सकता है... ना जाने कितने अरमान उसके मार दिए जाते है... और ना जाने कितने सपने वो खुद ही तोड़ लेती है। इस देश में लड़कियों का रेप सिर्फ बाहरी मर्द नही बल्कि अपने खुद के बाप, मामा, चाचा, ताउ तक करते है... तार-तार कर देते है वो उन सभी रिश्तों को... उस लड़की के अरमानों को... नही अंदाजा लगा सकते है आप कि कितनी बार उस लड़की ने खुद को मारने की कोशिश की होगी... कितना दुख हुआ होगा उसे जब किसी ने उसकी मर्जी के बिना उसे उंगली भी लगाई होगी......

बिना उस लड़की के हालात जाने... बिना वहाॅं पर मौजूद रहे... बिना ये देखे की क्या वाकई में रेप पीड़िता कि कोई गलती है? किरण खेर जैसे लोग अपने नतीजों पर पहुॅंच जाते है... मैं हर रोज अपने घर तक पहुॅंचने के लिए आॅटो का सहारा लेती हूॅं और आॅफिस से निकलते निकलते लगभग हर रोज़ ही अंधेरा हो जाता है... लेकिन जब मैं आॅटो में बैठती हूॅं तो कई बार उस आॅटो में एक भी औरत मौजूद नही होती है.. तो क्या ऐसे में मेरा उस आॅटो में बैठना पाप है? ... चलिए एक बारी के लिए मान भी लीजिए की मैं एक ऐसे आॅटो में बैठ गई जिसमें कोई औरत पहले से बैठी थी जिसके बाद वो अगले स्टाॅप पर उतर गई... तो क्या मुझे भी उस स्टाॅप पर उतर जाना चाहिए क्योकि उस आॅटो में अब एक भी औरत नही बची थी....

इस देश की सांसद बनने से बहुत पहले... आपने अपने आप को सशक्त एक महिला के रूप में लोगो के सामने रखा था...इस बेतुकी सलाह के बाद उनकी सालों मेहनत और एक स्वतंत्र महिला होने के प्रमाण पर उन्होने खुद पानी फेरा है क्योकि कोई भी सशक्त औरत इस तरह कि सोच नही रखती है.... और अगर आपकों उस लड़की की इतनी ही चिंता है तो आप उन आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी चढ़वाने में मदद कर सकती हैं... लेकिन आप ऐसा थोड़ी करेंगी क्या? आप तो नसीहतें देंगी....

मेरा ऐसा मानना है कि अगर आप किसी रेप, ऐसिड, दहेज पीड़िता कि मदद नही कर सकते है तो कृपा करें और चुप रहें... खुद एक औरत होने के बावजूद कैसे आप दूसरी औरत को नसीहत दे सकती है उस समय में जब उसके उपर हर शब्द का गहरा असर पड़ेगा...आपको तो अपनी पार्टी के बाकि नेताओं की तरह चुप्पी ही साध लेनी चाहिए थी.. जोकि पूरी औरत ज़ात के उपर बहुत बड़ी मेहरबानी होती...


मैं किरण खेर की बतौर एक अदाकारा आज भी बहुत इज्जत करती हूॅं लेकिन उनके इस बेवकूफी भरे बयान के बाद मेरे साथ लगभग हर लड़की के लिए नामुमकिन हो गया है बतौर महिला उनकी इज्जत करना...... क्योकि रेप होना किसी भी लड़की की गलती नही होती है... रेप तो 5 साल की बच्ची का भी होता है और 70 साल की बुढ़िया का भी, अगर किसी को वाकई में ध्यान रखने की जरूरत है तो वो है राजनेताओं क्योकि मुझे लगता है कि इस लोकतंत्र में हर कोई बिना सोचे समझे बोलता है....

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